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सपने

PoetryShayari
Pradyumn Kumthekar 3 min read

Card Number 1

जितने इंसान उतने सपने

सपने वो नहीं होते जो हम नींद में देखते है ,बल्कि वो होते है जो हमें सोने नहीं देते...

- Dr A P J Abdul Kalam ji

सपने, ख़्वाब, dreams—हम सब कभी न कभी ये शब्द सुनते हैं और हम सभी के लिए इनके मायने भी अलग-अलग होते हैं। इस दुनिया में जितने इंसान हैं, शायद सपने भी उतने ही हों, या शायद उससे भी ज़्यादा। यह ज़रूरी तो नहीं कि एक इंसान सिर्फ एक ही सपना देखे। वहीं, कुछ लोगों के सपने एक जैसे भी हो सकते हैं, इसलिए सपनों की गिनती कम भी हो सकती है। सपनों का एक जैसा होना कोई जुर्म नहीं है; लेकिन सपने भले ही एक हों, उन्हें पाने का हर इंसान का तरीका अलग-अलग होता है।

सपने पीढ़ियों के हिसाब से भी बदलते रहते हैं। मान लीजिए, आपके पिता का सपना दो पहियों वाली गाड़ी लेना रहा हो, आपका सपना कार लेना हो और कल को आपके बच्चों का सपना अपना हवाई जहाज़ रखने का हो।